Dhanteras Pooja Vidhi, Muhurat 2024
पूजा का शुभ मुहूर्त (Dhanteras 2024 Puja Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, धनतेरस के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 29 अक्टूबर की शाम 6 बजकर 31 मिनट से शुरू होगा और 8 बजकर 13 मिनट पर समापन होगा।
नई सजावटी वस्तुएं लाते वक्त रखें ध्यान
हर वस्तुओं की अपनी ऊर्जा शक्ति होती है। हर पदार्थ का अपना अध्यात्मिक गुण होता है। इस दिवाली प्लास्टिक व चाइनीज वस्तुओं से बचें। प्लास्टिक से राहु दोष होता है, जितना प्लास्टिक हम अपने घर में लायेंगे उतना राहु दोष उत्पन्न होगा। स्टील व लोहे से बनी वस्तुएं शनि दोष लाती हैं। इस धनतेरस मिट्टी, सोना, चांदी, तांबा व पीतल से बनी वस्तुएं घर लाएं।
मिट्टी के बर्तन करते हैं बुद्ध शुद्ध
घर में मिट्टी के बर्तन व मूर्तियां लाने से बुध ग्रह शुद्ध होता है। बुध ग्रह शुद्ध होने से हमारा बौद्धिक विकास होता है। श्री गणेश देव का आशीष प्राप्त होता है।
चांदी करती है चंद्रमा को शुद्ध
चांदी हमारे चंद्र ग्रह को शुद्ध करती है। हमें शांति व समृद्धि प्रदान करती है। तांबा सूर्यदेव का आशीष साथ लाता है।
तांबा लाता है सूर्य देव की कृपा
तांबे के बने बर्तन घर में लाने से हमारा यश व सम्मान प्रतिष्ठा बढ़ती है।
दिवाली के दिन कभी भी काले कपड़े या काला सामान नहीं खरीदना चाहिए. इस दिन चमकीली चीजें खरीदना शुभ माना जाता है.
धनतेरस पर क्या खरीदे
· सिल्वर या गोल्ड कॉइन
· हल्दी
· नमक
· झाड़ू
· कौड़िया
· कील बतासे
· धनिया
· तांबे या कांसा का बर्तन
· सजावट का सामान
· बही खाते
क्या नहीं खरीदे
· प्लास्टिक
· लोहा
· स्टील
· अल्मुनियम
· काला सामान
· आयल
· सीसे से बने सामान
धनतेरस पूजा विधि
पूजा सामग्री
• आटे से बना 4 बत्तियों वाला एक दीपक/दीया
• सिक्के
• पवित्र जल और एक चम्मच
• बैठने का आसन
• आसन के लिए कपड़ा
• मिठाइयाँ
• खील, बताशा
• धूप, धूपदान
• बाती, तेल/घी और माचिस
• छेद वाला एक खोल
• पुष्प,
• चावल, रोली, चंदन
ध्यान दें: पूजा के लिए उपयोग की जाने वाली सामान्य पूजा सामग्री के अलावा, आपको गेहूं के आटे से बने दीये की आवश्यकता होगी जो यमदीप के रूप में काम करेगा।
पूजा विधि
• धनतेरस की पूजा शाम को तारे देखने के बाद की जाती है।
• एक लकड़ी का मंच रखें और रंगोली में स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। स्वस्तिक के मध्य में चार बत्तियों वाला आटे का दीया रखें। कौड़ी में छेद करके उसे दीपक के ऊपर रखें और तेल या घी से दीपक जलाएं। इसे यमदीप या मृत्यु के देवता यमराज को समर्पित और परिवार के पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने वाला दीपक भी कहा जाता है।
• धन्वंतरि मंत्र का 108 बार जाप करें और धन्वंतरि की पूजा और पुष्प अर्पित करें।
• धन्वन्तरि मन्त्र “ओम् धन धन्वतरे नमः

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